Unproven Fertility Treatments

Because of complexity of Infertility spectrum, most of the patients are not conversant with the entire process and various treatments that are available. Infertility has many causes and hence the nature of infertility problems is not uniform. There are different kinds of infertility problems and each one of them demands specific and separate treatment. For an example, some infertility problems can be solved through IUI, while some demand IVF. Then there are a lot of tests to determine copious elements or facets of the problem. Amidst all these technical things, patients are left baffled. Most of them do what doctors suggest or order.

While most of the IVF Doctors in Noida are honest and have tremendous credibility, there are a few rotten apples too who hoodwink patients by taking undue advantage of their ignorance. These corrupt doctors only want to feather their nest and hence ask patients to undergo a lot of unnecessary tests which have absolutely no bearing on the final outcome. The efficacy of these treatments is unproven and hence there is not point asking patients to embrace them.

Recently Human Reproduction, the leading IVF medical journal, published an article that had a list of unproven treatments. These are –

  • Embryo glue
  • Sperm DNA fragmentation
  • Time-lapse imaging
  • Preimplantation genetic screening
  • Mitochondria DNA load measurement
  • Assisted hatching

While every IVF Centre in Delhi is entitled to earn reasonable profit, it is better to earn it by providing world-class services and treatment, rather than hoodwinking patients. Patients, on their part, must also be aware about the fundamental facts about infertility treatments and all the latest happenings in the field of fertility.


Unconsummated Marriage v/s Infertility

When a couple doesn’t have any child, people jump to conclusion that either male partner or female partner or both are infertile. Such a presumption is completely misplaced. Many a time, couples are childless despite both partners being fertile and capable of having a child. What people don’t realize is childlessness can be a product of unconsummated marriage too.

Unconsummated marriage means that couples have never had intercourse in their married life. Sometimes, couples are too nervous to talk about sex life even with their spouse. Some couples do not engage in sex in a proper manner and that prevents female partner from getting pregnant. At times, tensions and bitterness in marriage keep partners away from indulging in sex. There can be many other reasons behind unconsummated marriage.

Now, when couples approach IVF Doctors in Delhi, even most of them (Doctors) don’t factor in the possibility of unconsummated marriage initially. They prescribe a series tests to determine the exact nature and causes of the problem. And at times, much time and energy elapse in a wild goose chase. Ideally, IVF Doctors must begin with basic counselling session and try to understand the metal & psychological state of couples. They (Doctors) must make couples comfortable and encourage them to share their apprehensions and concerns.

Sometimes, all couples need is bit of a pep talk to boost their morale and eradicate fear or tips & techniques about how to indulge in sex properly. IVF Clinics in Delhi must understand and encourage their doctors to hold counselling sessions before prescribing tests and starting treatment.

How top-of-the-line IVF Clinics enhance chances of success

Among all the fertility treatments, success-rate of IVF is undeniably the highest. That makes it the most trusted and sought-after fertility treatment. But it is also the most intricate and knotty one. It has a lot of stages and the entire process is an elaborate one. There are a lot of factors which determine the success and failure of IVF Treatment in Delhi. The biggest factor is the quality of Fertility Clinic in Delhi. The quality of any clinic is determined by the credentials/qualifications of its IVF Specialists, infrastructure, laboratory, mechanism and equipment.

Since, IVF entails copious nitty-gritty, a doctor has to demonstrate superlative skills and steadfast discretion throughout the treatment. There must be no lapse in concentration or focus. Also, the doctor must possess enormous dexterity to carry out functions efficiently at various stages. That is possible only when the doctor is immensely proficient and seasoned.

Laboratory is the nucleus of any IVF clinic. The fertilization and other important functions take place in laboratory, so it is paramount that laboratory has ultra-modern equipment, avant-garde filters and other paraphernalia. It should have the apparatus that keeps all sorts of pollutants at bay so that quality of embryos is not adversely affected.

Another important aspect is the quality-control system. It has to be impenetrable and impeccable so that there is no scope of any laxity at any stage of the treatment. The procedure must be duly followed as per the industry standards and quality measures.

That’s why it is pivotal that couples should choose IVF clinics wisely. In many cases, quality of clinic determines the success or failure of the IVF cycle.

आईवीएफ क्या है?

कृत्रिम परिवेशी निषेचन(आई.वी.एफ) ऐसा शब्द है जो बहुतो ने सुना होगा. भले ही लोग आई.वी.एफ शब्द से परिचित हैं , अधिकतर लोगो को यह पता नहीं है कि वास्तव में यह क्या है?.

आई.वी.एफ प्रजनन उपचार खास तौर से उन लोगों के लिए है जो बच्चा पैदा करने में असफल होते हैं. यह बांझ जोड़ों के उपचार की एक चिकित्सा प्रक्रिया है. आई.वी.एफ द्वारा बहुत से निःसंतान जोड़ों का गर्भधारण किया गया है और बच्चे पैदा हुए हैं.

गर्भावस्था में क्या होता है? गर्भावस्था के लिए महिला के अंड कोशिकाओं और पुरुष के शुक्राणुओं  की जरूरत होती है. दोनों के निषेचन से भ्रूण का सृजन होता है जो शिशु के विकास का प्रारंभिक चरण होता है. हालांकि, जब महिला के अंड कोशिकाओं या पुरुष के शुक्राणुओं या दोनों में कोई परेशानी आती है, ऐसी परिस्थिति में बांझपन होता है और गर्भाधान नहीं होता है . इसका मतलब महिला साथी प्राकृतिक रूप से गर्भवती नहीं हो पाती है. इस परिस्थिति में प्रजनन उपचार की जरूरत पड़ती है और आई.वी.एफ अहम भूमिका निभाता है.

जब दम्पत्ति ६ महीने से भी अधिक लगातार असुरक्षित यौन संबंध के बाद भी गर्भ धारण में असफल रहते हैं, तब मान लिया जाता है की अंड कोशिकाओं या  शुक्राणुओं या दोनों में परेशानियां हैं. चिकित्सकीय भाषा में दंपत्ति को बांझ कहा जाता है. हालाकि ऐसे मामले भी हैं जिसमे दंपत्ति कई सालो तक कोशिश करने पर प्राकृतिक रूप से गर्भ धारण करने में सफल रहे हैं. लेकिन ऐसे मामले दुर्लभ हैं

आई.वी.एफ  वह प्रक्रिया है जिसमें गर्भाशय से बाहर महिला के अंड कोशिकाओं और पुरुष के शुक्राणुओं  का निषेचन किया जाता है. निषेचन प्रयोगशाला में होता है . “इन विट्रो” शब्द
का द्योतक है ” कांच में “. निषेचन प्रक्रिया कांच के पेट्रीडिश में  प्रयोगशाला में किया जाता है. निषेचन से विकसित भ्रूण  को माता के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है और प्राकृतिक रूप से उसे बढ़ने दिया जाता है.

अनेकों प्रकार के निषेचन समस्याओं के कारण कई तरह के आई.वी.एफ प्रक्रिया का विकास किया गया है ताकि विभिन्न प्रकार के परेशानियों पर ध्यान दिया जा सके. कभी कभी परेशानियां शुक्राणुओं की संख्या में कमी, शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी,  अंड कोशिकाओं के गुणवत्ता में कमी या डिंबोत्सर्जन में परेशानी अनेक कारणों में से कुछ कारण हो सकते हैं.

आई.वी.एफ प्रक्रियाओं को मोटे तौर पर नीचे सूचीबद्ध किया गया है. हलांकि, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि  निषेचन उपचार व्यक्ति विशेष होता है और सामान्यीकृत नहीं किया जा सकता.

इंट्रायूटेरिन इन सेमिनेशन (IUI) ऐसी  तकनीक है जिसमें पुरुष के शुक्राणुओं  को डिंबोत्सर्जन के समय महिला के गर्भाशय में इंजेक्ट करते हैं. इस तकनीक का उपयोग तब होता है  जब महिला साथी की प्रजनन प्रणाली स्वस्थ और ग्रहणशील होती है पर पुरुष साथी के शुक्राणुओं की संख्या में कमी होती है.  शुक्राणुओं को प्रक्षालित किया जाता है और केवल स्वस्थ शुक्राणुओं को इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन तकनीक के लिए चुना जाता है. यदि आम तौर पर  शुक्राणुओं की गुणवत्ता ठीक होती है तब इंट्रायूटेरिनइनसेमिनेशन तकनीक सफल होती है और जल्द ही महिला साथी गर्भ धारण कर पाती है.

इंट्रासायटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) एक स्वस्थ शुक्राणु को पुरुष वीर्य से चुना जाता है और परिपक्व महिला अंड कोशिकाओं में इंजेक्ट किया जाता है. यह प्रक्रिया अमूमन तब चुनी जाती है जब पुरुष शुक्राणु की गतिशीलता कमजोर होती है. इंट्रासायटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन की उत्तम सफलता दर है ७०-८५% जब महिला अंड कोशिकाएं स्वस्थ होती हैं तो शुक्राणु को इंजेक्ट कर लिया जाता है तब वह प्राकृतिक तौर से निषेचन करता है. निषेचित भ्रूण को महिला साथी के गर्भाशय में स्थापित कर दिया जाता है .

डोनर आई.वी.एफ: अगर कोई भी साथी स्वस्थ अंड कोशिकाओं या  शुक्राणुओं का  पुनरुत्पादन नहीं कर पाता है तब डोनर(दाता)  अंड कोशिकाओं या  शुक्राणुओं या डोनर भ्रूण का प्रयोग किया जाता है. डोनर आई.वी.एफ तकनीक तब प्रयोग में लाया जाता है जब साथी किसी आनुवांशिक संचरित रोग से ग्रसित होता है. जब महिला की  डिम्बग्रंथि रिजर्व समाप्त या समयपूर्व डिम्बग्रंथि विफलता हो जाये तब डोनर अंड कोशिकाओं  की जरूरत पड़ती है. वैसी महिलाएं जिनका मासिक धर्म बन्द हो जाये वह भी डोनर अंड कोशिकाओं का रास्ता अपनाती हैं. दंपत्ति ART बैंक द्वारा गुमनाम डोनर का चयन कर सकते हैं.

किराए की कोख: किराए की कोख एक विकल्प है ऐसे दम्पत्तियों के लिए जो बच्चा तो चाहते हैं पर महिला साथी बच्चा नहीं रख सकती क्योंकि उनके गर्भाशय में कोई तकलीफ होती है या और कोई सम्बंधित परेशानी होती है .किराए की कोख एक  समझौता होता है जिसमे कुछ समय तक बच्चा सरोगेट माता के पास होता है फिर वह बच्चा दंपत्ति को दे दिया जाता है. भ्रूण का निषेचन प्रयोगशाला में होता है और निषेचन होने के बाद उसे सरोगेट माता के गर्भाशय में स्थापित कर दिया जाता है. बच्चे का सरोगेट माता से आनुवांशिक रूप से कोई सम्बन्ध नहीं होता है. ऐसे विभिन्न कारण है जिसके वजह से दंपत्ति किराए की कोख का सहारा लेते हैं और कैंसर का उपचार ऐसा एक कारण है जिसमे किराए की कोख की सलाह दी जाती है. महिलाएं जिनका गर्भाशय नहीं होता या जननांग से सम्बंधित अन्य कोई असामान्यताएं होती है वह किराए की कोख का सहारा ले सकती हैं.

पुरुष प्रजनन क्षमता:  पुरुष बांझपन ऐसी समस्या है जो बहुत से पुरुषों में पाई जाती है. पुरुष बांझपन उपचार खराब गुणवत्ता वाले शुक्राणु, कम शुक्राणु गणना, शुक्राणु का न बनना, वीर्यपात में असफलता और बहुत सी सम्बंधित समस्याओं को संबोधित करता है. बांझपन मुख्यता लाइफ स्टाइल सम्बंधित है. आई.वी.एफ प्रक्रिया में अंड कोशिकाओं के निषेचन के लिए बस एक शुक्राणु की जरूरत पड़ती है.

महिला प्रजनन क्षमता: बहुत सी महिलाओं को डिंबोत्सर्जन सम्बंधित समस्या होती है. ये उनके मासिक धर्म से पता चलता है. कुछ महिलाएं अनियमित  मासिक धर्म, दर्द भरा मासिक धर्म, बहुत खून निकलने वाला मासिक धर्म या मासिक धर्म न होना जैसी समस्याओं से ग्रसित होती है. यह सब डिंबोत्सर्जन चक्र से सम्बंधित है और सीधे प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं.  अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय से सम्बंधित असामान्यताएं आम बांझपन मुद्दा है. आई.वी.एफ की मदद से अंडाशय उत्तेजक कर परिपक्व अंड कोशिकाओं को बनाया जा सकता है.

दंपत्ति जो गर्भ धारण में असफल रहें हैं वे आई.वी.एफ से आशा रखते हैं. यह प्रक्रिया लाखों दंम्पत्तियों को शिशु का सुख देने में सफल रही है. कुछ दम्पत्तियों को लघु  समस्याएं हैं जो उन्हें गर्भ धारण से रोक रही है और कुछ को बड़ी समस्याएं हैं जो विभिन्न कारकों के वजह से हो सकती हैं.

बढ़ते हुए प्रजनन तरीकों की मांग के वजह से  बहुत से आई.वी.एफ क्लिनिक खुल गए हैं. मेडिकवर एक प्रमाणित प्रजनन क्लिनिक है जिसकी छाप पूरे विश्व में है और अच्छी सेवाओं और उच्च सफलता दर की वजह से  प्रतिस्थित है.

कुछ सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न:

क्या प्राकृतिक गर्भधारण की तुलना में आईवीएफ से गर्भपात या विकृति का जोखिम ज्यादा है?
प्राकृतिक गर्भधारण की तुलना में आईवीएफ से गर्भपात या विकृति का जोखिम बराबर है. असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक आनुवंशिक विसंगति को न तो बढ़ाता है न घटाता है.

क्या निर्धारित दवा और उपचार दिन के विशिष्ट समय में लेना जरूरी है?
सफल आईवीएफ प्रक्रिया के लिए डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा और उपचार लेना जरूरी है.

आईवीएफ या इनसेमिनेशन के बाद क्या यात्रा करना सुरक्षित है?
उचित होगा की २-३ दिन यात्रा टालें. हालांकि अगर मरीज किसी अन्य जगह से है तब कुछ विश्राम पश्चात घर के लिये प्रस्थान कर सकते हैं.

आईवीएफ या इनसेमिनेशन के बाद क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
कठोर शारीरिक गतिविधि से बचना जैसे की भारी वजन उठाना इत्यादि. यह सलाह दी जाती है कि ऐसे कामों से  प्रक्रिया के बाद से ले कर पूरे गर्भधारण के समय तक बचें.

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Amenorrhea and its effects on Fertility

Non-occurrence of periods is called Amenorrhea. Splitting headache, abdominal aching and burgeoning facial hair are some of the symptoms of Amenorrhea, but in some cases they do not appear at all or appear mildly. Amenorrhea can be divided into 2 kinds – a) Physiological and b) Pathological.

When the periods do not occur before puberty, during pregnancy and after menopause, it is called Physiological. Pathological Amenorrhea rears up because of few types of afflictions.

If any girl doesn’t get periods even after turning 16, she is diagnosed as primary Amenorrhea. But if the periods do not occur for more than 3 months among women who have a history of menstrual cycles, they’re diagnosed as secondary Amenorrhea. Secondary Amenorrhea leads to issues related to fertility.

Anovulation is the biggest reason behind secondary Amenorrhea. It (Anovulation) is the term used to describe the inability of ovary to produce or release eggs. PCOD is the major force behind occurrence of Anovulation. But there are other factors like multicystic ovaries and premature ovarian failure too.

Blood tests to check Prolactin, TSH, FSH, LH & AMH and a Vaginal Ultrasound Scan are some of the common prescribed tests to diagnose the cause of secondary Amenorrhea.

Hormonal imbalance is the most common cause of secondary Amenorrhea. It can occur as a result of:

  • Tumours on the pituitary gland
  • Thyroid imbalance
  • Low estrogen levels
  • High testosterone levels

The problem of irregular or abnormal periods must be treated for a woman to get pregnant. IVF Specialist in Gurgaon must keep in mind that merely regularizing periods might not completely solve the fertility issues. It is imperative to address the specific infertility problem and treat it. This is what any top Fertility Centre in Gurgaon must aim for.

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Why success-rate of some IVF clinics is low?

There are a lot of good management and engineering colleges established by the government (like IIMs & IITs) which offer specialization in different domains. But there are not many prestigious medical colleges established by the government who offer specialization in the IVF Treatment. Most of the government-administrated medical colleges have failed to keep up with changing times and have not included contemporary courses in their list of programs offered.

So at most, such colleges only produce gynecologists with little exposure and expertise in IVF. When they enter the marketplace, they find that they do not have adequate skills and knowledge about IVF and it is exceedingly tough for them to get a job in top fertility clinics in India.

Some of them then do a crash course or a short-duration diploma in IVF to grab a job. But IVF is such a complex and vast subject and cannot be grasped in a short span of time. Also, the practical exposure is as important as theoretical knowledge and during these crash courses or diplomas, one hardly gets to spend time in cutting-edge laboratories.

All they ultimately manage is to get into second-rate IVF clinics and that affects the success-rate of those clinics as these doctors are not competent, seasoned and adequately qualified. Hence, it is essential to ask doctors from where they have done their IVF training and about their experience in IVF treatment.

This is where Medicover Fertility stands out as one of the best IVF clinics in India as the fertility specialists are outstandingly skillful and experienced with impeccable academic credentials.

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The Importance of being an Embryologist

There are various factors which contribute to the success of IVF Treatment – from the quality of doctors to equipment. But one thing most patients overlook is the laboratory of Fertility Clinic and the Embryologist. While the laboratory is the nucleus; an embryologist is the bloodline of any IVF Clinic. Yet this aspect of infertility treatment is often relegated to the background by patients. While choosing IVF Clinics in Gurgaon, most of the patients only look at infrastructure, fee of the treatment and qualifications of doctors. An embryologist usually remains the unsung hero.

It is an undeniable truth that embryologist plays the most important part in the success (or failure) of IVF Treatment. Even if quality of eggs and sperms is excellent, it requires an embryologist of superlative finesse to turn them into healthy embryos in laboratory. In other words, good-quality eggs and sperms alone are not adequate to form salutary embryos. A crackerjack embryologist puts his skills to effective use and deftly whips up top-notch embryos. The empirical data suggests that IVF Clinics in India which have competent embryologists have a much higher success-rate than others.

Hence, patients must be quite careful and perceptive while choosing IVF clinic for treatment. Some of the clinics do not even have full-time embryologists and rely on travelling embryologists. Truth is that fertilization process requires considerable time and undivided attention. Make-shift embryologists do not have adequate time and often cut corners which savagely damage the likely outcome of treatment.

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